upa govt made so much money loot loot

Discussion in 'General Multimedia' started by arya, Feb 20, 2013.

  1. arya

    arya Senior Member Senior Member

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    haa haa in kongress rule corruption is kissing sky

    we are confused which case we will talk every month a new case is taking place with new record

    kongress will make our country empty


    जिस मनरेगा योजना से हिन्दुस्तान की तस्वीर बदलने का दावा किया गया, उसकी जमीनी हकीकत आप देखेंगे तो चौंक जाएंगे. पौने दो लाख करोड़ की जिस योजना ने कांग्रेस को दोबारा दिल्ली की सत्ता दिला दी, उस योजना में भ्रष्टाचार का दीमक लग गया.

    2009 में सत्ता में लौटने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने जीत की उपलब्-धि का सेहरा नरेगा के सिर बांधा. जिसके बाद तय हुआ कि नरेगा के साथ महात्मा गांधी का नाम जोड़ दिया जाए क्योकि नरेगा ने गांव की तस्वीर बदली है और गांधी जी गांव की तस्वीर ही बदलना चाहते थे.

    कांग्रेस के भविष्य राहुल गांधी ने तो राजस्थान में नरेगा के तहत कांम करने वाले ग्रामीणों के साथ मिट्टी उठाकर देश को इसका अहसास करा दिया कि सियासत के पांव जमीन से जुड़े रहने चाहिये.

    देश के सभी 624 जिलों में चल रही है मनरेगा योजना
    200 जिले और 15 हजार करोड़ से शुरू हुआ नरेगा आज की तारीख में देश के सभी 624 जिलों और सालाना 33 हजार करोड़ खर्च करने तक जा पहुंचा है. इस योजना के तहत अब तक सबसे ज्यादा 41 हजार करोड़ का बजट आवंटित किया गया.

    तो सियासत के लिहाज से चाहे नरेगा से मनरेगा ने देश की तासिर बदल दी लेकिन इसका असल सच एक ऐसी लूट का है जो महालूट में बदल चुकी है.

    अब तक आपने भ्रष्टाचार या घोटाले के जितने भी खुलासे देखे होंगे, उनमें ज्यादातर मामलों में घोटाले की रकम का अनुमान लगाया गया है. ऑपरेशन महालूट में आजतक जिस घोटाले का खुलासा करने जा रहा है, उसमें पैसा पहले निकला, घपला बाद में हुआ.

    करोड़ों खर्च हुए लेकिन तालाब और कुंए अब भी सूखे हैं
    सवा-सवा करोड़ के तालाब है पर एक बूंद पानी नही. सवा-सवा लाख के कुंए हैं पर दो फुट भी गहरे नहीं. बीस-बीस लाख की सड़कें हैं पर कागजों पर हैं वजूद. मरे लोगों के नाम पर जॉब कार्ड पर जिन्दा है बेरोजगार.

    ये महालूट की मुकम्मल गाथा की कुछ किस्-से हैं. ये हाल पौने दो लाख करोड़ रुपये वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना यानी मनरेगा की है. महात्मा गांधी के नाम पर चल रही ये दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार योजना है, जो बन गया है लूट और घोटाले का अड्डा.

    नीतीश राज में भी लूट का अड्डा बना मनरेगा
    बिहार के माथे से बदहाली का टैग हटाने वाले नीतीश कुमार के शासन में मनरेगा के अरबों रुपये से क्या क्या बदल गया.
    नीतीश के सुशासन का हाल इनसे बेहतर भला और कौन बताएगा. बिहार पुलिस में सुनील चौधरी असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर है. सुनील की मानें तो उनकी तैनाती पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा में भी रही.

    सुनील खुद बताते हैं कि मैं सीएम आवास में था. लेकिन ये क्या खगड़िया के रहीमपुर पचकुट्टी गांव के पंचायत रजिस्टर में सुनील चौधरी मनरेगा योजना के तहत मजदूरी कर रहे हैं. सरकारी खातों पर अगर यकीन करें तो सुनील एक हाथ से बिहार सरकार से तनख्वाह लेते रहे, तो दूसरे हाथ से केंद्र की मनरेगा योजना के तहत पैसा बटोरते रहे.

    आज तक को 2010 के दस्तावेज हाथ लगे, जिसमें सुनील चौधरी और उनके दो भाईयों की मजदूरी का कच्चा चिट्ठा है. तीनों भाईयों के नाम पंचायत की तरफ से मजदूरी के एवज में पैसा भी दिया गया. आगे का सच खुद नीतीश के दरोगा खुद बताते हैं.

    मनरेगा की आड़ में चल रहे महालूट का ये कोई इकलौता किस्सा नहीं. पंचायत स्तर से जो भ्रष्टाचार की सीढ़ी शुरू होती है, उसका पहला पायदान है जॉब कार्ड में भारी घपला. मनरेगा के तहत काम चाहिए तो जॉब कार्ड की जरुरत होगी.

    बिना मजदूर के मजदूरी मिलती है बिहार में
    सिर्फ बिहार की बात की जाए तो सात सालों में अब तक एक करोड़ 26 लाख लोगों को जॉब कार्ड जारी किया गया. पिछले दस महीनों में इन जॉब कार्ड के आधार पर 1109 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान किया गया.
    जॉब कार्ड जिसके आधार पर काम का सत्यापन करके मजदूरी का भुगतान किया जाता है. लेकिन बिहार में मनरेगा को लेकर उल्टी गंगा बह रही है. काम मिले या ना मिले, जॉब कार्ड हाजिर हो जाएगा. करोड़ों की रकम डकारने के लिए मिल जाएगा जॉब कार्ड बनाने का चलता फिरता कारखाना. आदमी हो या न हो, वोटर लिस्ट में नाम और पते दर्ज हों. वोटर लिस्ट से फोटो मिल जाए, बस जॉब कार्ड मिल जाएगा.

    दिल्-ली में काम करने वाले को बिहार में मिली मजदूरी
    नाम द्वारिका तिवारी. सुनील चौधरी की ही तरह तिवारीजी का भी फर्जी जॉब कार्ड बनाकर अफसरों और प्रधानों ने वारे न्यारे कर दिए.

    तिवारीजी औरंगाबाद के खाते पीते लोगों में से एक है. बेटा बहू दिल्ली में बढि़या नौकरी कर रहे हैं. लेकिन मनरेगा की माया तो देखिए. पंचायत के रजिस्टर पर पूरा खानदान ही मजदूरी करता रहा और मजदूरी की रकम मुखिया और अफसर डकारते रहे.

    औरंगाबाद के अमरेन्द्र प्रसाद की शिकायत भी कुछ अलग नहीं. हरियाणा की एक फैक्ट्री में काम करने वाले अमरेन्द्र के नाम पर मनरेगा में खाता तो खुला गया, लेकिन इन साहब को इसकी जानकारी ही नहीं.

    जॉब कार्ड में घपलों की शिकायतें जगह-जगह हैं. कहीं फर्जी जॉब कार्ड बना कर मजदूरी की रकम की बंटरबांट हो रही है, तो औरंगाबाद जिले के मदनपुरा थाना क्षेत्र में ऐसे तमाम लोग मिले जिनके जॉब कार्ड में हेरा फेरी की गयी.

    पुलिस करने लगी प्रधानों की वकालत
    जॉब कार्ड के आधार पर खुले बैंक खाते और पासबुक में गड़बड़ी की शिकायत लेकर जब मजदूर थानेदार से मिलने पहुंचे तो थानेदार साहब रपट लिखने की जगह आजतक के कैमरे के सामने ही अफसरों और प्रधानों की ही पैरवी करने लगे.

    थानेदार साहब जब भ्रष्टाचारियों की ही पैरवी करने लगे तो आजतक की टीम मजदूरों के साथ औरंगाबाद के उप विकास आयुक्त राम विकास पाण्डेय से मिलने पहुंची. कैमरे पर उपविकास आयुक्त महोदय ने गड़बड़ी मान ली.

    जॉब कार्ड के गड़बड़झाले को लेकर खगडि़या के प्रोग्राम अधिकारी राज कुमार चौधरी ने भी पैसों के भुगतान में गड़बड़ी की बात कबूली. सबूत सामने रख कर आजतक ने जब सवाल उठाए तो अफसरों ने गड़बड़ियों की बात मान ली, लेकिन इस पर कैसे लगाम लगे इसे लेकर किसी के भी पास कोई जबाव नहीं.

    मनरेगा के मजदूर के आंकड़े तो देख लिए अब मजदूरी के किस्-से भी जानिए. पटना से 125 किलोमीटर दूर बेगुसराय का भगतपुर गांव. सड़क के साथ कच्ची नाली. ये वही जगह है जहां पर 2000 से ज्यादा सागवान, नीम, आम और कदम के पेड़ लगाए जाने थे. 2009-2010 में मनरेगा के तहत पंचायत को करीब 15 लाख रुपये दिए गए थे. उपजाऊ मिट्टी होने के बाद भी पेड़ कहां गायब हो गए. कायदे से अब तक पेड़ को 10 फुट तक बड़ा हो जाना चाहिए था, लेकिन आजतक की टीम को यहां पेड़ तो क्या घास तक देखने को नहीं मिली.

    सरकारी कागजों पर जिस प्रोजेक्ट को पूरा दिखाया गया, लेकिन हकीकत की जमीन पर जिनका वजूद ही नहीं था. ऐसे मामलों को लेकर आजतक की टीम ने बेगुसराय की पुलिस और प्रशासन से संपर्क किया तो उन्होंने शिकायतों की जांच कराने भर का सिर्फ आश्वासन ही दिया.

    जांच कब तक पूरी होगी. कार्रवाई जब भी हो, लेकिन सच यही है की पेड़ लगाने से लेकर सड़कें बनाने के नाम पर, कुंए से लेकर तालाब खोदने के नाम पर दिल्ली से पैसा दिल खोल के आ रहा है, तो यहां दिल खोल के लूटा जा रहा है.
     
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  3. arya

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    MGNREGA scheme which was claimed to change the face of India, will be shocked when you see the ground reality. Twenty-two million million plan to Congress the power to Delhi again reminded of corruption in the scheme took termites.

    After returning to power in 2009, Prime Minister Manmohan Singh and Sonia Gandhi NREGA head wreath tied to the achievement of victory.

    If Congress Rahul Gandhi's future Kanm the villagers under NREGA in Rajasthan with the soil that made up the country to realize its political feet must be connected to ground.

    MGNREGS scheme operates in all 624 districts of the country
    200 districts and 15 thousand crore NREGA start date, all 624 districts of the country and the year has reached 33 thousand million to spend. Under this scheme, the highest so far been allocated a budget of 41 thousand million.

    Whether in terms of the politics of the country Tasir MGNREGS of NREGA changed but it is actually really Mahalut is transformed into a robbery.

    By now you have all the revelations of corruption or fraud might have seen them in most cases is the estimated amount of scams. In Mahalut till the operation is going to expose the scam, the money came first, later became embroiled.

    Ponds and wells are dry but still cost millions
    Quarter - a quarter million, not one drop of water on the pond. Quarter - a quarter million, not too deep wells at two feet. Twenty - two million on roads that exist on paper. Unemployed job card in the name of the victims alive.

    The complete saga Mahalut some of these stories. Twenty of these recent lakh crore Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme has the MGNREGS. Mahatma Gandhi's name operates the world's largest employment plan, which has become a den of robbery and fraud.

    Raj Kumar also haunted booty MGNREGS
    Removal of the tag from the forehead of Bihar Nitish Kumar regime collapse billions of MGNREGA what has changed.
    Who will tell them good and better governance of the state of Bihar. Bihar Police Assistant Sub Inspector Sunil Chaudhary. According to Sunil to protect their deployment in Bihar Chief Minister Nitish Kumar said.

    Sunil myself that I was in CM housing. But what of Khagaria Rhimpur Pckutty village panchayat registers are wages under MGNREGS Sunil Chaudhary. If you believe a hand on official accounts Sunil taking a salary from the state government, on one hand, to gather money under MGNREGS center.

    Documents found by the 2010 date in which Sunil Chaudhary and his two brothers to get your wages. The names of the three brothers from panchayat was money in lieu of wages. Further Nitish's own inspector really speak for themselves.

    MGNREGS running in the guise of a single case of these not Mahalut. Panchayat level of corruption ladder begins to notch his first huge patchwork job card. Should work under MGNREGS job card will be required.

    Receive no wage earner in Bihar
    Bihar is concerned only one crore 26 lakh people in seven years so far been issued job cards. In the past ten months, depending on the job cards were paid wages of Rs 1109 crore.
    Based on work by verifying job card which wages are paid. But over MNREGA in Bihar is reverse discrimination. With or without work, job card spot will be. Burping will amount to millions of itinerant job card making factory. Man or not, the voter list contains the names and addresses. Voter list to find the photo, just to get the job cards.

    Wages in Bihar was working in Delhi
    TI name Dwarka. Sunil Choudhary bogus job cards by the same officers and leaders of Tiwariji varaey be consecrated.

    Aurangabad is one of Tiwariji people eat and drink. Son-in-law in Delhi are good jobs. But the illusion of MGNREGS see. The whole family is on the register of the panchayat wages and salaries sum of the chief officers are Dkarte.

    Aurangabad AMARENDRA offerings complaint is no different. Haryana who works in a factory AMARENDRA then open an account in the name of MGNREGS, but not all that aware of it.

    Complaints of job card swindles place - place. Somewhere creating bogus job cards Bntrbant is the amount of wages, so that all people in Aurangabad district, police said Madanpura whose job card was Hera Pheri.

    Police officers involved in advocating


    The inspector of the corrupt workers lobbied with the team till Aurangabad gone to meet the Deputy Development Commissioner Ram Pandey development. Dear Commissioner agreed Upvicas crooks on camera.

    The deterioration of the job card program officer Raj Kumar Chaudhary Kgdihya payment of money, admitted to manipulation. Until today, when questioned by the evidence put before the officials agreed to upsets, but how it took control of it to anyone not answer any questions.

    MGNREGA wages Tales of labor statistics, learn now to have a look. Bgtpur village about 125 km from Patna to Begusarai. Raw groove along the road. This is the place where more than 2000 teak, neem, mango and move trees were planted. Panchayat under MGNREGA in 2009-2010 were Rs 15 lakh. Fertile soil where trees have disappeared after.

    Official papers showed complete the project, but the reality on the ground was not non-existent.

    How long the investigation will be completed. Action when it is, but it's the truth in the name of the trees from roads, digging wells, from the name of the pond frankly money is coming from Delhi, so here is frankly being robbed.
     
  4. arya

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  6. arya

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