दबाव नहीं, बढ़ रही काम की उमंगः मोदी

Discussion in 'Politics & Society' started by Rowdy, May 11, 2015.

  1. Rowdy

    Rowdy Co ja kurwa czytam! Senior Member

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    मोदी सरकार का एक साल होने को है। क्या जनता की अभूतपूर्व अपेक्षाओं का दबाव महसूस हो रहा है?
    (सहज मुस्कान के साथ) देश में 30 साल बाद पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है। सरकार बनने के पीछे करोड़ों देशवासियों की मनोस्थिति थी और देश की तत्कालीन स्थिति थी। चारों तरफ निराशा का माहौल था। आए दिन भ्रष्टाचार की एक नई खबर उजागर होती थी।
    सरकार के अस्तित्व की कहीं अनुभूति नहीं होती थी। ऐसे घनघोर निराशा के माहौल में यह सरकार जन्मी। आज हर देशवासी गर्व के साथ कह सकता है कि बहुत कम समय में निराशा को न सिर्फ आशा में लेकिन विश्वास में तब्दील करने में हम सफल हुए हैं। एक समय था सरकार नहीं है, ऐसी चर्चा थी। आज चर्चा है, सरकार सबसे पहले पहुंच जाती है। एक समय था रोज नए भ्रष्टाचार की घटनाएं थीं।
    आज एक साल में भ्रष्टाचार का कोई आरोप हमारे राजनीतिक विरोधियों ने भी नहीं लगाया। एक साल के अनुभव से कह सकता हूं कि दबाव का नामो-निशान नहीं है। हकीकत में तो जैसे-जैसे एक के बाद एक काम में सफलता मिलती जा रही है, एक के बाद एक अच्छे परिणाम मिलते जा रहे हैं, जनता का प्रेम और आशीर्वाद बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे हमारे काम करने की उमंग बढ़ती जा रही है।
    भूमि अधिग्रहण बिल वक्त की मांग
    2013 के कानून में किसान विरोधी जितनी बातें हैं, विकास विरोधी जो प्रावधान हैं, अफसरशाही को ब़़ढावा देने के लिए जो व्यवस्थाएं हैं, उनको ठीक करके किसान एवं देश को संरक्षित करना चाहिए। हम जो सुधार लाए हैं, अगर वो नहीं लाते तो किसानों के लिए सिंचाई योजनाएं असंभव बन जाती।

    सरकार कुछ कर नहीं पा रही है, क्या एक साल में ऐसी धारणा नहीं बनी है?

    (अर्थपूर्ण तरीके से हंसते हैं) चुनाव के पूर्व के इन दिनों को याद कीजिए। अपना खुद का अखबार निकाल लीजिए। उसमें क्या भरा प़़ड़ा था। अब गत एक वषर्ष के अखबार निकाल लीजिए। लोकसभा चुनाव से पहले आप देखेंगे दैनिक जागरण इन खबरों से भरा प़़ड़ा होता था कि ये घोटाला, वो घोटाला.. ये काम नहीं हुआ, वो काम नहीं हुआ.. इस बात का पता नहीं, उस बात का पता नहीं।
    अब अभी के अखबार देखिए क्या छपा है? आपदा आई नेपाल में और भारत सरकार पहुंच गई। यमन में हम पहुंचे, कश्मीर की त्रासदी हो तो हम वहां थे। कोई घोटाला नहीं है। ओले गिरे तो सारे मंत्री खेतों में पहुंच गए। सबको दिख रहा है। पहले चर्चा होती थी 1.74 करो़ड़ का कोयला घोटाला। इस बार गौरव से खबरें आ रही हैं कि दो लाख करो़ड़ रुपये से ज्यादा सिर्फ दस फीसद कोयला ब्लॉक की नीलामी से आ गए।
    तब खबरें थी कि महंगाई ब़ढ़ रही। अब आती है कि इतनी कम हो रही है। यही समाचार आ रहे हैं। पहले दुनिया के देशों में विदेश मंत्री जाते थे और दूसरे देश का भाषण प़ढ़कर आते थे। अब दुनिया के देश हिंदुस्तान की बात बोलने लगे हैं। बिजली उत्पादन पर आएं तो पिछले तीस साल में इतना ग्रोथ कभी नहीं हुआ। स़ड़क निर्माण पर आएं तो पिछले दस सालों में प्रति दिन दो किलोमीटर सड़क बनने का औसत था, जो अब 10 किलोमीटर से ज्यादा पहुंच गया है। एफडीआई और विदेशी पर्यटक के आने जैसे हर क्षेत्र में अच्छी खबरें हैं, आप कोई भी विषय ले लीजिए।
    (फिर थोड़ा रुककर..) मोदी के राज में समय पर आफिस जाना पड़ता है। यही आलोचना होती है।
    भविष्य के लिहाज से देश के सामने मुख्य चुनौतियां क्या हैं और इनसे पार पाने के लिए कितना समय चाहिए?

    आपने हमारे इस साल का बजट पत्र देखा होगा। देश की ऐतिहासिक समस्याओं को 5-7 साल में दूर करने का हमने बी़ड़ा उठाया है। वह चाहे गरीबों को घर देने की बात हो, पानी, बिजली, स़ड़क की सुविधाएं पूर्ण करने की बात हो, कोई कारण नहीं है कि देश का एक ब़ड़ा तबका इन सारी सुविधाओं से वंचित रहे।
    शिक्षा की बात हो। डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया से देश को प्रौद्योगिकी और हुनर देने की बात हो। हम एक युवा देश हैं और आधुनिक युग की जरूरतों के मुताबिक देश के नौजवानों को रोजगार के साथ-साथ विश्व के साथ आंख में आंख मिलाकर काम कर सकें, इस प्रकार तैयार करना जरूरी है।
    मगर सरकार को गरीब विरोधी ठहराने में विपक्ष कामयाब दिख रहा है। भूमि अधिग्रहण पर कांग्रेस आक्रामक है, लगता है कहीं कोई कमी रह गई?

    (पंचवटी में अचानक उठे मोरों के कलरव को सुनकर हम सभी थो़ड़ी देर चुप हो जाते हैं..फिर वह सहज भाव से कहते हैं) इसका पूरा इतिहास समझिए। भूमि अधिग्रहण विधेयक पर 120 साल बाद विचार हुआ। इतने पुराने कानून पर विचार के [लिए 120 घंटे भी लगाए थे क्या? नहीं लगाए थे। और उसमें सिर्फ कांग्रेस पार्टी दोषी है, ऐसा नहीं है। हम भी भाजपा के तौर पर दोषी हैं क्योंकि हमने साथ दिया था।
    चुनाव सामने थे और सत्र पूरा होना था, इसलिए जल्दबाजी में निर्णय हो गया। बाद में हर एक राज्यों को लगा कि ये तो ब़ड़ा संकट है। मुझे सरकार बनने के बाद करीब-करीब सभी मुख्यमंत्रियों ने एक ही बात कही कि भूमि अधिग्रहण विधेयक ठीक करना प़ड़ेगा, वरना हम काम नहीं कर पाएंगे। हमारे पास लिखित चिट्ठियां हैं।
    जैसे सियासी हालत बने, उससे नहीं लगता कि भूमि अधिग्रहण विधेयक पर किसानों को समझाने में आपकी सरकार विफल रही है?

    आपकी बात सही है। किसी न किसी राजनीतिक स्वार्थ के माहौल के कारण सत्य पहुंचाने में अनेक रुकावटें आई हैं। ये भ्रम फैलाने में हमारे विरोधी सफल हुए हैं कि भूमि अधिग्रहण विधेयक आने के बाद कारपोरेट घरानों के लिए जमीन ले ली जाएगी, जबकि हकीकत यह है कि कारपोरेट के लिए जमीन देने के मामले में हमने 2013 के विधेयक में मौजूद प्रावधान को रत्ती भर भी नहीं बदला है।
    हमारे सुधारों के तहत किसी भी उद्योग घराने या कारपोरेट को कोई जमीन नहीं दी है और न ही ऐसा कोई इरादा है। हमने जो सुधार सूचित किए हैं उनसे एक इंच जमीन भी उद्योग को मिलने में सुविधा नहीं होगी। ये सरासर झूठ है लेकिन चलाया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण विधेयक में बदलाव करना, ये न भाजपा का एजेंडा और न ही मेरी सरकार का एजेंडा है। करीब सभी राज्य सरकारों की तरफ से इसमें बदलाव का आग्रह था।
    जल्दबाजी में बने हुए 2013 के कानून में किसान विरोधी जितनी बातें हैं, विकास विरोधी जो प्रावधान हैं, अफसरशाही को बढ़ावा देने के लिए जो व्यवस्थाएं हैं, उनको ठीक करके किसान एवं देश को संरक्षित करना चाहिए। हम जो सुधार लाए हैं, अगर वो नहीं लाते तो किसानों के लिए सिंचाई योजनाएं असंभव बन जातीं।
    गांवों में किसानों को पक्के रास्ते नहीं मिलते। गांवों में गरीबों के लिए घर नहीं बना पाते। इसलिए गांव के विकास के लिए, किसान की भलाई के लिए कानून की जो कमियां थी वो दूर करनी जरूरी थीं और जिसकी राज्यों ने मांग की थीं। हमने किसान हित में एक पवित्र एवं प्रामाणिक प्रयास किया है। मुझे विश्वास है कि आने वाले दिनों में झूठ बेनकाब होगा और भ्रम से मुक्ति मिलेगी।
    इस संवेदनशील मुद्दे पर भाजपा और सरकार के कई नेता भी हिचक रहे थे, फिर भी भूमि अधिग्रहण विधेयक पर सरकार ने सियासी खतरा लिया?
    जैसा मैनें कहा कि भूमि अधिग्रहण विधेयक में बदलाव करना, ये न भाजपा का एजेंडा है और न ही मेरी सरकार का। सभी मुख्यमंत्री तो इसमें बदलाव चाहते ही थे। इस बीच एक घटना ऐसी घटी कि कांग्रेस के वरिष्ठ और अनुभवी नेता रहे जेबी पटनायक असम के राज्यपाल थे। मैं राज्य के दौरे पर गया तो राजभवन में उन्होंने मुझसे दो बातें कहीं। पहली तो कि मोदी जी मेरी एक इच्छा है कि एक माह के बाद मेरा कार्यकाल खत्म हो रहा है, मेरे जाने से पहले उत्तराधिकारी आ जाए।
    दूसरी बात उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने प्रशासनिक अनुभव के नाते कही। उन्होंने कहा कि हमने या हमारे लोगों ने परिपक्वता के अभाव में भूमि अधिग्रहण विधेयक लाए हैं, इसे मेहरबानी करके खत्म करो। इससे देश नहीं चलेगा। मैं वषर्षों तक आडिशा का मुख्यमंत्री रहा हूं, मेरा अनुभव कहता है कि ऐसा नहीं चल सकता। वह कांग्रेस के ब़़डे नेता और अनुभवी व्यक्ति थे।
    रोजगार व अन्य मुद्दों पर भी आपकी सरकार सवालों के घेरे में है?

    सरकार में रहते हुए विपक्ष ने स्वयं कुछ नहीं किया। जिन लोगों को पांच-पांच, छह-छह दशक तक इस देश में एक चक्री राज करने का हक मिला। उन लोगों की कमजोरी है कि वे सत्ता भी नहीं पचा पाए। अब आज घोर पराजय के बाद पराजय भी नहीं पचा पा रहे हैं।
    हम भली-भांति जानते हैं कि इस देश में जातिवाद का जहर, सांप्रदायवाद का जहर, गरीबों के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाने की परंपरा इस देश ने लंबे अरसे से देखी है। हम जिन संकल्पों को लेकर चल रहे हैं। उनके तहत आने वाले 5-7 सालों में देश की तस्वीर अलग होगी और यही बात उनको सोने नहीं दे रही है। इसलिए हमारे कामों में बाधा डालने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। अच्छी भावनाओं के साथ उठाए गए हमारे कदम भी वे लोग गरीब विरोधी और किसान विरोधी कहकर प्रस्तुत कर रहे हैं। लेकिन देश का गरीब और किसान समझदार है और हमारी नीयत और निष्ठा को जानता है।
    हम गरीबों और किसानों की आमदनी बढ़े युवाओं को रोजगार मिले, इस दृष्टि से लगातार कदम उठा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि देश की जनता हमारे साथ खड़ी रहेगी। जहां तक विपक्ष के हमें गरीब विरोधी ठहराने का सवाल है तो उसके लिए मुझे इतना ही कहना है कि अगर वे लोग गरीबों के हितैषषी थे तो देश में आज भी गरीबी क्यों है? किसने रोका था उन्हें गरीबी दूर करने से?
    हमारी रणनीति है गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने की। हमें गरीबों को ही विश्वस्त साथी बना कर, कंधे से कंधा मिला करके गरीबी के खिलाफ लड़ाई ल़ड़नी है और जीतनी है। हमारा विश्वास है कि गरीबी के खिलाफ ये ल़़डाई जीतने के लिए गरीब ही सबसे शक्तिशाली माध्यम है और हमने उसी को अपना साथी बना कर गरीबी से मुक्ति की एक जंग आरंभ की है, जिसमें विजय निश्चित है।
    आपकी सरकार ने वास्तव में गरीब, मध्य वर्ग और छोटे व्यापारियों के लिए 12 माह में कुछ किया है?

    आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा। आमतौर पर समाज का यह वर्ग सरकारों में अछूता रह जाता है। आज भारत के भविष्य को बनाने में मध्य वर्ग और निम्न मध्य वर्ग बहुत बड़ी भूमिका अदा कर सकता है। हमने उस पर ध्यान केंद्रित किया है। हमारी जितनी भी योजनाएं हैं, वो गरीबों, किसानों, मध्य वर्ग को समर्पित हैं। लोकसभा चुनाव के पहले एवं सरकार बनने के बाद हमारा एक ही मंत्र रहा है कि युवा वर्ग के लिए रोजगार ब़ढ़ाना है। इसलिए हमनें देश को वैश्विक निर्माण हब बनाने की दिशा में काम शुरू किया।
    उद्योग जगत की उम्मीदें धूमिल होने लगी हैं। वे लोग मानने लगे हैं कि सरकार कुछ ज्यादा उनके लिए नहीं कर रही है।
    अपने पहले सवाल और इस सवाल को मिलाकर देखें तो खुद ही आरोपों में विरोधाभास नजर आएगा। एक तरफ विरोधियों का कहना है कि हम अमीरों के लिए काम करते हैं। और अमीर कहते हैं कि हमारे लिए कुछ नहीं करते हैं। कारपोरेट घरानों की हमारे लिए यह शिकायत स्वाभाविक है।
    क्योंकि पिछली सरकार की तरह हम भाई-भतीजावाद के आधार पर प्रशासन नहीं चलाते। जो ईमानदारी से आगे ब़ढ़ना चाहता है, बड़ा बनना चाहता है, उसके लिए हमारी नीतियां स्पष्ट हैं। उसका लाभ कोई भी उठा सकता है। लेकिन अगर गलत रास्ते से किसी को कुछ पाना है तो यह इस सरकार में संभव नहीं है। शिकायत का एक कारण और भी है कि हमारे देशों में मजदूरों को उनके नसीब पर छोड़ दिया गया था।
    मजदूरों का कोई रखवाला नहीं था। मजदूरों के हित में कोई सरकार निर्णय करने को तैयार नहीं थी। हमने श्रमेव जयते का अभियान चलाया। श्रमिक के सम्मान को प्राथमिकता दी। मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की। मजदूरों को उनके हक का ईपीएफ का पैसा आवश्यक रूप से मिले, इसके लिए यूनिवर्सल एकाउंट नंबर (यूएएन) शुरू किया। अब स्वाभाविक है कि मजदूरों के लिए ये सब देना पड़ रहा है तो शिकायत रहेगी ही रहेग
     
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  3. sob

    sob Moderator Moderator

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    @Rowdy if you can translate this page for our friends who do not read Hindi this would be wonderful.

    Otherwise we could be having threads in a dozen languages.
     
  4. Rowdy

    Rowdy Co ja kurwa czytam! Senior Member

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    The article is too big. and NaMo gave the interview in Hindi .... and was printed in Hindi .. actually the 10000 character limit is too low and I chopped off major portions about Pak & china from the interview. Please increase the character limit. Those who wish to read may use google translate on this link:
     
  5. Rowdy

    Rowdy Co ja kurwa czytam! Senior Member

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    @sob I am not able to post links. I get a server error occurred.
     
  6. sob

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    Just try to give the highlights at least, as a courtesy to other members.
     
  7. Illusive

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  8. Samar Rathi

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    Modi government is having a year. What people feel the pressure of unprecedented expectations?
    (spontaneous smile) after 30 years in the country's first majority government was formed. The mood of the nation was behind the government and the country's former position was worth millions. The atmosphere was disappointment all around. Corruption was the highlight of the day came a new news.
    The government did not realize the existence somewhere. Such pouring despair born in the atmosphere of this government. Today countrymen can say with pride that in a very short time not only to despair but in hope we have succeeded in turning into confidence. There was a time the government has not had such a discussion. Today's discussion, the government reaches first.Rose was a time of new corruption cases.
    Today, in the year corruption charges imposed by our political opponents. A year's experience, I can say that the pressure is not trace. In fact, as one is going to get success in work, are going to get a good result after another, the love and blessings of the people is increasing, so our work is increasing exultation is.
    Land Acquisition Bill for the moment
    there are 2013 law as anti-farmer, anti D The provisions of bureaucracy Bhhdawa arrangements to allow them the right of farmers and land must be preserved. We reform, if it becomes impossible to bring irrigation to the farmers.

    The government can not do anything, what a year, there is no such notion?

    (meaningful way laughs) elections in East Remember the days. Get out of your own paper. What was the full Phhdha. Now let's take the last one Vsrsh newspaper. Before the elections you will see Phhdha Dainik Jagran was full of reports that the scam, scam .. It was not that he was not aware of that .. no, not address that matter. So now the newspaper See what has been printed? The disaster occurred in Nepal and India has risen. We arrived in Yemen, Kashmir tragedy if we were there. There is no scam. Hail fell all the ministers reached the fields. Everybody is looking. 1.74 Krohd coal scam was first discussed. The news coming from the glory that only ten per cent over Rs two million Krohd came from the auction of coal blocks.The reports that inflation is Bhdh. Now comes that is so low. That news are coming. Were the first countries in the world and the foreign minister of another country came Phdhkr speech. Speaking countries of the world are now talking of India. Switch to power in the last thirty years has not been so much growth. In the last ten years to come to build roads kilometer road for an average of two per day, which has now reached more than 10 kilometers. FDI and foreign tourists come every area of good news, you can take any subject. (Then wait a bit ..) He has to go to the office at the time of the Raj. That is criticized.

    What are the main challenges facing the country in terms of the future and how much time they want to get across?

    You must have seen our letter this year's budget. To overcome the historical problems of the country in 5-7 years we have raised Bihdha. Whether it be a matter of giving it to the poor house, water, electricity, roads to be a matter of complete facilities, there is no reason that the elder section of the country are deprived of all these facilities. Speaking of education. Digital India, the country's technology and talent skills to become India. We are a young country and by the needs of the modern era youth employment in the country as well as to work together with the world at the eye, thus must be prepared.

    But the government, the opposition managed to justify anti-poor showing is. Congress on land acquisition is aggressive, lacking somewhere?


    (Panchavati peacocks suddenly wakes us all Thohdi hearing the tweet turn up late Hanllfir he says simply that) the whole history again.

    Land Acquisition 120 years after the bill was considered. So the old law to consider [120 hours were spent what? Did not send. And it is only guilty party, it is not. We are guilty because we gave the BJP.

    Elections were front and the session had to be completed, so the decision was hasty. Each one felt later states that the elder crisis. I have since become government said only one thing that almost all chief ministers to fix Phdega Land Acquisition Bill, otherwise we will be unable to work. We have written letters.

    As the political situation made him think farmers on land acquisition bill failed to convince your government?

    Your point is correct. Due to the rough environment of political self-interest, many obstacles are encountered in delivering true. Our opponents have succeeded in creating the illusion that the Land Acquisition Bill will be taken after the corporate to the ground, whereas the reality is that corporate giving in to the ground, we do not have one ounce of 2013. The provision in the bill has changed. Our reforms under any industry or corporate house has no ground, nor has any such intention. We have reported improvements in their facilities to meet the industry will not even an inch of land. The sheer lie but is being run. Changes in Land Acquisition Bill, it's not BJP's agenda, nor my government's agenda. Nearly all states had urged a change from. 2013 law made in haste as there are anti-farmer, anti-growth provisions, the bureaucratic arrangements for the promotion, by correcting them farmers and country must be preserved. We reform, if they do not bring irrigation to the farmers would have become impossible. villages along the way farmers do not get fixed. Not make up for the poor in rural home. So for the development of the village, for the good of the farmer of the law were needed to overcome the drawbacks and which states she was called up. We have a sacred and authentic farmer interest is attempted. I believe that in the coming days will expose the lies and get rid of confusion. The sensitive issue of party and government leaders also were reluctant, however, to the Land Acquisition Bill, the government took the political risk? Like I said the land acquisition make changes to the bill, it is not the BJP's agenda nor my government. So the chief was looking for a change. Meanwhile, such an incident occurred that senior Congress leader JB Patnaik, Governor of Assam were more experienced. I went on a tour of the state in the royal palace told me two things.My one wish is that one, that Modi ji month after my term is over, before leaving my successor to come. Secondly, as the chief minister of Orissa, he said, as his administrative experience. He said that we or our lack of maturity by the Land Acquisition Bill, please finish it. This country will not. I am Chief of Vsrshon Adisha up, my experience says that it can not run. Bhhde Congress leader and experienced person.

    employment and other issues are also called into question your government is
    in government, the opposition did not do anything himself. Those five, six decades in this country had a right to rule-wheeler. Their weakness is that they could not digest even power. Now rout today after the debacle are still incomprehensible. We know very well that the poison of racism in this country, Sanpradaywad poisoning, poor crocodile tears in the name of tradition, this country has seen for a long time. We are running with the resolutions. Under the picture of their country will be different in the coming 5-7 years, and this is not her bed. So our actions are making every effort to disrupt. With good feelings taken our steps anti-poor and anti-farmer saying they are presented. But the country's poor and farmer understanding and our faith and loyalty knows. We were poor, youth employment and income for the farmers, are taking steps consistent with this vision. I believe that our people will stand with us. As far as the opposition is concerned, we are anti-poor justification for that I say that if they were poor Hitassi poverty in the country today, why? Who stopped them from poverty? Our strategy of fight against poverty. By creating a trusted partner to us poor, found side by side and win the fight against poverty is Lhdni. We believe that these Lhhdai against poverty as the most powerful medium and we have to win the poor by making him his partner started a war of liberation from poverty, in which victory is certain.
     
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  9. Samar Rathi

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    Your government really poor, middle class and 12 months for small traders have done? You asked a very good question. This class of society, governments usually remains untouched. Today, India's middle class and lower middle class in the future would play a big role. We have to focus on that. Whatever our plans, that the poor, the farmers, the middle class committed.The first government after the elections and we have the same mantra that youth employment is Bhdhana. So we work towards making India a global manufacturing hub began. Industry expectations are beginning to tarnish. They began to believe that the government is not doing much for them. See my previous question and this question together we will see a paradox in itself charges. Aside opponents say that we work for the rich. And the rich do not say anything to us. For us it is natural to corporate complaints. Because of the previous government, we do not run the administration on the basis of nepotism. Who honestly wants Bhdhna ahead, wants to be great, for that our policies are clear. Anyone can take advantage of her. But if the wrong way to get something to someone, it is not possible in this government. One reason for the complaint and that the workers in our countries were left on their luck. The workers had no caretaker. A government decision in the interests of the workers were not willing to. We campaigned to jayate Srmev. Gave priority to the dignity of labor. Ensure the safety of workers. EPF money of the workers of their rights necessarily met, the Universal Account Number (UAN) began. Now it is natural that the workers have to pay for all this will be the only complaint Rheg
     
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  10. Singh

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    Please provide translation for all non-English posts. :)
     
  11. Ancient Indian

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    If you are using firefox, there is this addon named -Quick Translator 1.0 which translates the whole page or the selected text for you.
     

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